समस्तीपुर Town

समस्तीपुर के युवक की कोरोना में नौकरी गई तो गांव में ही लगा दी चूड़ी-लहठी की फैक्ट्री

समस्तीपुर। (प्रकाश कुमार) कोविड-19 के खतरे और लॉकडाउन के बीच राजस्थान से लौटे युवक न केवल अपने घर में रहकर अच्छी कमाई कर रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। उनका हुनर आज आसपास के लोगों को भी प्रशिक्षित कर रहा है। ताजपुर प्रखंड के भेरोखड़ा गांव में राजस्थान के जयपुर से लौटे कई कामगार गांव में ही रहकर चूड़ी-लहठी निर्माण का काम कर रहे हैं। इसमें प्रतिमाह उन्हें औसत पांच हजार रुपये तक की कमाई हो रही है।

चूड़ी उद्योग से जुड़े कारीगरों ने बताया कि सभी जयपुर की एक फैक्ट्री में काम कर रहे थे। लॉकडाउन में सभी अपने गांव लौटे थे। जीविका द्वारा गांव में ही रोजगार करने को लेकर प्रेरित करने के बाद पांच युवक तैयार हो गए। हालांकि, चूड़ी उद्योग में महंगे कच्चे माल की आवश्यकता होती है, इसलिए वे लोग पूंजी के अभाव में बड़े स्तर पर काम नहीं कर पा रहे हैं। मो. परवेज का दावा है कि सरकार द्वारा इन कारीगरों को प्रोत्साहन मिले तो अपने गांव पर ही रहकर आसानी से भरण-पोषण कर सकते हैं।

पूंजी की कमी आ रही है सामने

चूड़ी उद्योग से जुड़े कारीगरों ने बताया कि सभी जयपुर की फैक्ट्री में काम कर रहे थे। लॉकडाउन में जब जयपुर में चूड़ी उद्योग से जुड़े युवक जब वापस आए तो वे भी यहीं से काम करने लगे। हालांकि, चूड़ी उद्योग में महंगे कच्चे माल की आवश्यकता होती है, इसलिए वे लोग पूंजी के अभाव में बड़े स्तर पर काम नहीं कर पा रहे हैं। मो. परवेज ने बताया कि सरकार द्वारा प्रोत्साहन मिले तो अपने गांव पर ही रहकर आसानी से भरण-पोषण कर सकते हैं।

जीविका ने किया सहयोग को शुरू किया काम

जयपुर में 10 वर्ष से ज्यादा चूड़ी उद्योग में काम कर चुके मो. परवेज, दिनेश राम, मो. हैदर, मो. सितारे और मो. लड्डन का कहना है कि गांव आने के बाद विचार आया कि चूड़ी निर्माण का काम यहीं रह कर किया जाए। इसको लेकर उन लोगों जीविका की ओर से भी प्रोत्साहित किया गया। जीविका की ओर से 50 हजार रुपये ऋण दिया गया। जिससे उनलोगों ने रोजगार शुरू किया।

नहीं मिलता है सरकारी सहयोग

ग्रामीण स्तर पर चूड़ी उद्योग को संचालित करनेवाले युवाओं ने बताया कि उन्हें और भी अधिक सहयोग की जरूरत है, लेकिन कोई ऐसा सिस्टम नहीं है, जहां से आसानी से उन्हें पूंजी का लाभ मिल सके। पूंजी उपलब्ध हो तो ऑडर अधिक लेकर सप्लाई किया जा सकता है। वहीं, गांव में भी रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

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