पटोरी

प्रवासियों में हुनर के साथ काम का जुनून भी, खोल सकते तरक्की का दरवाजा

समस्तीपुर। विभिन्न प्रदेशों में रह रहे बिहार के प्रवासी कामगार बड़ी संख्या में अपने घर लौटे हैं। ये वैसे कामगार हैं जो बिहार के बाहर विभिन्न राज्यों के विकास को गति देते रहे। इनमें हुनर भी है, काम करने का जुनून भी। यदि सरकार इसका फायदा उठाए तो बिहार की तरक्की की नई इबारत लिखी जा सकती।

जिले के सभी प्रखंडों में बड़े पैमाने पर कामगार अपने घर लौटे हैं। काफी संख्या में क्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे। कई लोगों को मुक्त कर उनके घर भेज दिया गया है। जिले की 381 पंचायतों में आए इन कामगारों के स्किल सर्वे का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। यह काम क्वारंटाइन सेंटरों पर ही किया जा रहा। इतना ही नहीं, आइसोलेशन से मुक्त हुए कामगारों को तेजी से जॉब कार्ड देते हुए उन्हें काम पर भी लगा दिया गया है। अकुशल प्रवासियों ने तो काम करना शुरू भी कर दिया। कितु, कई कुशल और अतिकुशल कामगार भी काम के लिए अपनी सहमति दे रहे।

जिले के विभिन्न क्वारंटाइन सेंटरों पर किया जा रहा सर्वे

समस्तीपुर जिले के 20 प्रखंडों में बनाए गए विभिन्न क्वारंटाइन सेंटरों पर आए प्रवासी कामगारों का सर्वे किया जा रहा। उनसे यह जानकारी ली जा रही है कि वे विभिन्न प्रदेशों में किस तरह का काम कर रहे थे। उन्हें जॉब कार्ड बना कर भी दिया जा रहा है। इसके लिए उनके आधार और पैन नंबर की जानकारी ली जा रही। इच्छुक कुशल मजदूरों से भी रोजगार के लिए पूछा जा रहा। जो लोग पूर्व में आए थे और क्वारंटाइन के बाद अपने घर को चले गए, उनका भी सर्वे रोजगार सेवकों द्वारा कराया जा रहा। उनकी स्किल मैपिग का काम भी युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।

कृषि मजदूरों से भी मिलती कम मजदूरी

बिहार में मनरेगा के कामगारों को कृषि मजदूरों से भी कम राशि दी जा रही है। कई ऐसे प्रदेश हैं जिनके द्वारा ऐसे कामगारों को आकर्षक पारिश्रमिक मिलती है। जिन अकुशल कामगारों को बिहार में 192 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जाते हैं, वहीं हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में 300 रुपये से अधिक की राशि प्रति दिन दी जाती है। वहां अतिकुशल कामगारों को 429 रुपये भी दिए जाते हैं। पांच से छह सदस्य वाले परिवार के मनरेगा मजदूर बिहार में ऐसी स्थिति में अपना भरण-पोषण कैसे कर पाएंगे, यह एक बड़ी समस्या है।

न फैक्ट्री और न ही सालों भर काम

प्रवासियों में से कई श्रमिकों ने बताया कि बिहार में न तो फैक्ट्री है और नहीं सालों भर काम मिल पाता। सरकार की योजना के अनुसार सिर्फ 100 दिन का ही काम मिलता है और वह भी कम मजदूरी में। स्थानीय लोगों के द्वारा दिए गए काम करने के पश्चात जब रोज काम नहीं मिलता तो उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति आ जाती है। बताते हैं कि अन्य प्रदेशों की फैक्ट्री में तो वे काम करते ही हैं, जहां आकर्षक वेतन मिलता है। साथ ही, ओवरटाइम कमाने पर दोगुने दर से उन्हें पैसे दिए जाते हैं। यह सुविधा बिहार में नहीं है।

बिहार में बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी बाहर से लाते हैं कामगार

विभिन्न क्वारंटाइन सेंटर पर रह रहे प्रवासी कामगारों ने बताया कि बिहार में कई बड़ी-बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनियां काम करती हैं। जो बड़े-बड़े भवन, पुल, ओवर ब्रिज, फ्लाईओवर ब्रिज और रेलवे आदि में काम करवा रहे हैं। प्राइवेट एजेंसी की कंस्ट्रक्शन कंपनियों द्वारा बाहर से मजदूर लाकर काम करवाया जाता है। यदि यहां की सरकार यह सुनिश्चित कर दे कि यह कंपनियां बिहार की ही मजदूरों को रखेंगी तो रोजगार का अवसर अपने प्रदेश में भी मिल सकेगा।

जॉब कार्ड बनने के बाद भी रहते बाहर

कई ऐसे कामगार हैं जो विभिन्न प्रदेशों में रहकर काम करते हैं। कितु उनके नाम पर का जॉब कार्ड बन चुका है। यह जॉब कार्ड किसी न किसी पंचायत प्रतिनिधि या अन्य प्रखंड र्किमयों के पास रहता है। इनके नाम पर पैसे का उठाव हो जाता है, लेकिन कुछ ले देकर सारे पैसे आलाकमान की जेब में चली जाते हैं। कई कामगार बताते हैं कि सरकारी योजनाओं में लूट खसोट के कारण आम लोगों को सही लाभ नहीं मिल पाता।

प्रवासियों को कई पंचायतों में दिए गए काम

जिले के पटोरी, मोहिउद्दीननगर, मोहनपुर, कल्याणपुर, मोरबा, ताजपुर, सरायरंजन आदि प्रखंडों के कई पंचायतों में क्वारंटाइन से मुक्त कामगारों को काम भी दिया गया है। अकुशल कामगारों को प्राय: मिट्टी करण का काम दिया गया है। इसके तहत जल-जीवन-हरियाली योजना के पर काम कराया जा रहा है। कई क्षेत्रों में प्लांटेशन के अतिरिक्त तालाब और नहर की उड़ाही का भी कार्य कराया जा रहा। क्वारंटाइन सेंटर पर बांटे जा रहे जॉब कार्ड

जिले के कई ऐसे प्रखंड हैं, जहां अब क्वारंटाइन सेंटर पर ही जॉब कार्ड बांटने के कार्य शुरू कर दिया गया है। क्वारंटाइन से मुक्त होने वाले लोगों के बीच उनके स्किल मैपिग के पश्चात उनके नाम का जॉब कार्ड निर्गत कर दिया गया है और उन्हें उसी सेंटर पर प्रदान कर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्य में अब और तेजी लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि लगभग 50 हजार से अधिक जॉब कार्ड पूरे जिले पहले से ही निर्गत थे और इस अवधि में भी बड़ी संख्या में मजदूरों के लिए जॉब कार्ड बनाए जा रहे हैं।

ग्रामीण स्तर पर कोरोना संक्रमण रोकने के लिए चलाया जा रहा अभियान

सरकार ने सख्त निर्देश जारी किया है कि ग्रामीण स्तर पर कोरोना का संक्रमण हर हालत में रोका जाए। इसके लिए क्वारंटाइन सेंटर में सु²ढ़ व्यवस्था की जा रही है। चौकीदारों को भी प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। इसके लिए जिले के लगभग 300 चौकीदारों को प्रतिनियुक्त किया गया है। ये चौकीदार ना सिर्फ क्वारंटाइन सेंटर पर रखे गए हैं, बल्कि इन्हें क्षेत्र में जाकर वैसे लोगों का भी पता लगाना है जो बिना सूचना के बाहर से आकर विभिन्न गांव में रह रहे हैं। बयान

पूरे क्षेत्र में स्किल सर्वे का काम तेजी से किया जा रहा है। क्वारंटाइन सेंटर पर ही जॉब कार्ड दिए जा रहे हैं। कई पंचायतों में बाहर से आए प्रवासी कामगारों को काम पर भी लगा दिया गया है। यह काम काफी तेजी से किया जा रहा है, ताकि उन्हें बाहर जाने से रोका जा सके।

मो. शफीक, एसडीओ, पटोरी

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