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रूस की कोरोना वैक्‍सीन कब आएगी, किसे मिलेगी? 5 बड़े सवालों के जवाब

मॉस्‍को की सेचेनोव यूनिवर्सिटी (Sechenov First Moscow State Medical University) ने कोरोना की पहली वैक्‍सीन (Covid-19 first vaccine) का सफलतापूर्वक ट्रायल पूरा करने का दावा किया है। स्‍पतनिक न्‍यूज एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। रूस की गमलेई इंस्‍टीट्यूट ऑफ एमिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी (Gamalei Institute of Epidemiology and Microbiology) ने यह वैक्‍सीन तैयार की थी। सेचेनोव यूनिवर्सिटी में वैक्‍सीन का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा था। वैक्‍सीन की लास्‍ट स्‍टेज का ट्रायल यह दिखाने के लिए था कि इंसानों के लिए यह कितनी सुरक्षित है। रिसर्चर्स के मुताबिक, सभी स्‍टेज में वैक्‍सीन का ट्रायल सफल रहा है।

कोरोना वैक्‍सीन बनाने में रूस ने मारी बाजी

कोरोना वैक्‍सीन बनाने में रूस ने मारी बाजी, ट्रायल पूरा करने का दावादुनिया की पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन का वालंटियर्स पर ट्रायल पूरा हो गया है। रूस की Sechenov First Moscow State Medical University ने यह दावा किया है। वालंटियर्स पर 18 जून से ट्रायल शुरू किए थे। अगर यह दावा सच है तो कोरोना वैक्‍सीन डेवलपमेंट में रूस सबसे आगे निकल गया है क्‍योंकि अभी तक किसी और वैक्‍सीन का ट्रायल पूरा नहीं हो सका। चीन, अमेरिका और अन्‍य कई देशों की वैक्‍सीन ट्रायल के फेज 2 या 3 में हैं। कुछ वैक्‍सीन तो ट्रायल के शुरुआती दौर में ही फेल हो गईं मगर रूस ने पहली वैक्‍सीन की सफलता का दावा किया है। यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसलेशनल मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी डायरेक्‍टर वदिम तरासोव के मुताबिक गेमली इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने यह वैक्‍सीन तैयार की है। उन्‍होंने स्‍पतनिक से बातचीत में कहा कि सारे सेफ्टी स्‍टैंडर्ड्स पर खरा उतरने के बाद ही वैक्‍सीन का ट्रायल पूरा हुआ है।

कब तक बाजार में आने की उम्‍मीद?

यूनिवर्सिटी के इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल पैरासाइटोलॉजी के डायरेक्‍टर अलेक्‍जेंडर लुकाशेव ने कहा कि डेवलपर ने आगे के वैक्‍सीन डेवलपमेंट का प्‍लान बना लिया है। अब वायरस के रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद इसका प्रॉडक्‍शन शुरू हो जाएगा। लुकाशेव ने कहा कि प्रॉडक्‍शन बढ़ाने की संभावनाओं पर भी बात चल रही है। सबकुछ ठीक रहा तो दो से तीन महीने में वैक्‍सीन का प्रॉडक्‍शन शुरू हो सकता है। हालांकि रूसी ट्रायल पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं जिसे देखते हुए इसके अप्रूवल में देरी हो सकती है।

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रूस ने वैक्‍सीन डेवलप करने का दावा तो कर दिया है मगर यह साफ नहीं किया कि वैक्‍सीन उपलब्‍ध कैसे कराई जाएगी। ट्रायल में सिर्फ 38 वालंटियर्स के यूज पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में यह हो सकता है कि इस्‍तेमाल के लिए अप्रूव होने से पहले और रिसरर्च की जरूरत पड़े। अगर वैक्‍सीन का यह प्रोटोटाइप अप्रूव हो जाता है तो यह दुनिया में उपलब्‍ध पहली कोरोना वायरस वैक्‍सीन होगी। फिर रूस वैक्‍सीन की उपलब्‍धता को लेकर नियम बना सकता है। चूंकि सारे वैक्‍सीन डेवलपमेंट प्रोग्राम्‍स को वर्ल्‍ड हेल्‍थ ऑर्गनाइजेशन मॉनिटर कर रहा है, इस वजह से भी वैक्‍सीन का जल्‍द ग्‍लोबल अप्रूवल मुश्‍किल है।

कितनी सेफ है रूस की ये वैक्‍सीन?

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लुकाशेव ने कहा कि वैक्‍सीन का आखिरी ट्रायल इसकी इंसानो पर सेफ्टी जांचने के लिए ही किया गया था। उन्‍होंने स्‍पतनिक से कहा, “वैक्‍सीन की सेफ्टी कन्‍फर्म है। यह उन वैक्‍सीन जितनी ही सुरक्षित है जो अभी बाजार में हैं।”

कब शुरू हुआ ट्रायल, कितने दिन में पूरा?

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रूसी न्‍यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, ट्रायल का पहला दौर 18 जून को शुरू हुआ था। तब 18 वालंटियर्स को यह वैक्‍सीन दी गई थी। दूसरे फेज का ट्रायल 20 वालंटियर्स के साथ 23 जून को शुरू हुआ।

जिनपर ट्रायल हुआ, उनका क्‍या होगा?

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रूसी वैक्‍सीन का ह्यूमन ट्रायल पहले फेज में जिन 18 वालंटियर्स को वैक्‍सीन दी गई थी, उन्‍हें 15 जुलाई को डिस्‍चार्ज किया जाएगा। 23 जून को जिन 20 वालंटियर्स को वैक्‍सीन डोज मिली, वे 20 जुलाई को डिस्‍चार्ज होंगे। रूसी यूनिवर्सिटी के मुताबिक, सारे वालंटियर्स स्‍वस्‍थ हैं।

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