समस्तीपुर Town

समस्तीपुर सदर अस्पताल में कैंसर व मानसिक रोगियों के लिए नहीं है दवा, इलाज के बगैर ही लौट रहे हैं मरीज

स्थानीय सदर अस्पताल में कैंसर व मानसिक रोगियों के लिए ओपीडी शुरू हुए करीब एक वर्ष बीत चुके हैं। लेकिन कैंसर व मानसिक रोगियों के अपचार की दवा की खरीदारी अबतक नहीं हो पाई है। जिससे उपचार कराने पहुंचे रोगियों को बेरंग लौटना पड़ता है। आर्थिक रूप से संपंन कैंसर रोगी खुद के पैसा का किमा चढ़ाने की दवा खरीदकर लाते हैं तो उनका उपचार हो जाता है। गरीब मरीजों को वापस घर लौटने की मजबूरी होती है। कैंसर व मानसिक रोगियों के नोडल पदाधिकारी डॉ गिरीश कुमार बताते हैं कि करीब एक वर्ष पूर्व जिले में करीब 100 कैंसर रोगी की सूची बनाई गई थी। मरीजों पटना, दिल्ली नहीं जाना पड़े इसके लिए अस्पताल में उपचार की व्यवस्था की गई थी। मरीज आने भी लगे थे लेकिन दवा नहीं रहने के कारण उनका उपचार नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले छह माह के दौरान पांच कैंसर रोगियों को किमा चढ़ाया गया है। लेकिन सबो ने खुद किमे की दवा खरीद कर दिया था। दवा के लिए विभाग को कई बार पत्राचार किया गया है। मानसिक रोगियों के लिए भी नहीं है कोई दवा|मानसिक रोगियों के उपचार के लिए भी डॉ गिरीश कुमार को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। डॉ गिरीश इसके लिए बेंगलुरू से विशेष ट्रेनिंग लेकर आए हैं। मानसिक रोगियों के उपचार की घोषणा के बाद मरीजों का आना जाना भी शुरू हुआ था। 50 से अधिक लोगों ने रजिस्टर में नाम भी दर्ज कराया था लेकिन दवा नहीं रहने के कारण मरीजों का उपचार शुरू नहीं हो पाया।

शराब- सिगरेट समेत दूसरी आदत से छुटकारा को उपचार
डॉ गिरीश कुमार बातते हैं कि अगर कोई शराब, सिंगरेट समेत अन्य कोई बुरी आदत से छुटकारा पाना चाहता है तो इसके लिए सदर अस्प्ताल में उपचार की व्यवस्था की गई है। इस तरह के रोगियों का बेंगलुरू निमहांस के डॉक्टर ऑनलाइन टेली मेडिसिन द्वारा उपचार करते हैं। लेकिन दवा नहीं रहने के कारण इस दिशा में भी काम आगे नहीं बढ़ पाया है।

नोडल पदाधिकारी कैंसर व मानसिक रोगियों के लिए दवा की खरीदारी का डिमांड करें तो दवा उपलब्ध करा दिया जाएगा। वैसे अभी प्राथमिकता कोरोना को दी जा रही है। पहले कोरोना से जंग जीत लिया जाय। गंभीर रोगी यथा संभव घरों में ही रहे।सतीश कुमार सिन्हा, प्रभारी सिविल सर्जन

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