समस्तीपुर Town

गूंज उठा गंगा का तट, हर किसी के प्यारे थे अमन

समस्तीपुर । शहीद अमन की चिता से निकली ज्वाला ने गंगा की जलधारा को साक्षी मान क्षितिज पर आज इंकलाब लिख दिया। रो रही वादियों और बेजान हो गए चमन के बीच पंचतत्व में विलीन हो गया अमन..। दिशाएं खामोश थीं, पूरे क्षेत्र के लोगों ने अपने इस लाल को सेना की सलामी के साथ विदा कर दिया और सहेज ली उसकी स्मृति, उसके स्वाभिमान और देशभक्ति का जज्बा। छोटे भाई रोहित ने जैसे ही मुखाग्नि दी, अग्नि की ऊंची लपटें आसमान को छूने के लिए बेताब होने लगीं। ये लपटें कह रही थीं- दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से खुशबू-ए-वफा आएगी। आखिरकार घरवालों को दगा देकर मां भारती के लिए कुर्बान हो गए अमन। उनके सहपाठी सेना में जाने की सोच रहे थे, कितु अमन उन सभी से आगे निकल गए।

गूंज उठा गंगा का तट

मोहिउद्दीननगर के सुल्तानपुर स्थित गंगा घाट पर ”भारत माता की जय”, ”शहीद सेनानी अमन अमर रहे” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। क्षेत्र के लोगों ने न तो ऐसी अंत्येष्टि देखी थी। इतनी अधिक भीड़ आज तक क्षेत्र के लोगों ने नहीं देखी। उसके कई साथियों ने जलती हुई चिता की अग्नि को साक्षी मानकर शपथ ली कि अमन की शहादत का बदला लेकर रहेंगे, मातृभूमि के दामन पर दाग नहीं लगने देंगे। शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति गंगा घाट पर मौजूद हो जिसकी आंखें गीली न हुई हों।

हर किसी के प्यारे थे अमन

अमन तीन भाई थे। बड़े भाई राहुल सिंह दिल्ली से सटे नौकरी करते हैं, जबकि छोटा भाई रोहित घर पर ही रहता है। जैसे ही इन भाइयों को अमन के शहीद होने की खबर मिली, किसी को विश्वास नहीं हुआ। बाढ़ स्थित अमन की ससुराल में भी खबर पहुंचते ही मातम पसर गया। खबर मिलने के बाद ससुराल से सभी लोग और उसके भाई तथा सगे-संबंधी उसके घर पहुंच गए थे। अमन जितने दुलारे अपने घर वालों के लिए थे, उतने ही ससुराल वालों के लिए भी। सहपाठियों के बीच वे इस कदर लोकप्रिय थे, जैसे भगवान श्रीकृष्ण अपने सखा के बीच। परिवार और समाज के लिए चहेते बने अमन आज पूरे देश की आंखों का तारा बन गए थे। उन्होंने पूरे विश्व में भारत की पताका लहरा दी। ऐसे वीर सपूत की जन्मभूमि सुल्तानपुर की मिट्टी को शत-शत नमन।

Share This Post