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सोच से ऊंची थी हवाई जहाज की उड़ान, मिला अपना आसमान

समस्तीपुर । कोरोना काल और लॉकडाउन अवधि में प्रवासियों की पीड़ा उभर कर आई। कई खाने को तरसे तो कई सैकड़ों किलोमीटर दूर पैदल चलकर घर पहुंचे। हर कदम पर चुनौती साथ चलती रही। लेकिन, इस दौर में कई सुखद अनुभव भी हुए, जिन्होंने मानवता की मिसाल पेश की। गुरुवार को दिल्ली से खानपुर पहुंचे 10 प्रवासी किसान श्रमिकों को देखकर यही अनुभव होता है। ट्रेन की सामान्य बोगी में सीट के लिए जूझते यात्रा से ऊपर हवाई जहाज का सफर बिल्कुल असामान्य लगता है।

दिल्ली से लौटे श्रीपुरगाहर गांव के रहनेवाले लखींद्र राम बताते हैं कि पिछले 27 साल से दिल्ली में पप्पन सिंह गहलौत के यहां काम कर रहे। अपने दो बेटों नवीन और प्रवीण के साथ गांव लौटे हैं। कहते हैं कि लॉकडाउन में फंसे तो मन ठहर गया। काम खत्म था, इसलिए चिता बड़ी थी। ट्रेन से जाने के लिए इतनी मशक्कत की गई। लेकिन, हम सभी की किस्मत में हवाई जहाज की सवारी थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि हवाई जहाज में सफर करेंगे। हम इस अनुभव को शब्दों में बयां नहीं कर सकते। 10 महीने बाद पहुंचा अपने गांव

नवीन बताते हैं कि वह सात महीना पहले काम पर दिल्ली गया था। उस समय उसका बेटा तीन महीने का था। उन्हें घर लौटने में काफी खुशी है। अभी क्वारंटाइन सेंटर पर हैं, घर पर जाकर बेटे से मिलेगा। कहते हैं कि पप्पन सिंह के यहां जो मान सम्मान मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता। पारिश्रमिक भी अच्छी मिलती है। मालिक ने मदद कर पेश की अनूठी मिसाल

लॉकडाउन की वजह से प्रवासी लोगों को अपने घर लौटने में परेशानी हो रही। गुरुवार को दिल्ली से लौटे जीवछ राम बताते हैं कि उनके मालिक ने उन्हें घर पहुंचाने के लिए मदद कर अनूठी मिसाल पेश की। वहां हमारे गांव से हम 10 लोग काम करते हैं। वे लॉकडाउन की वजह से फंसे हुए थे। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि इतना बढि़या और आसानी से अपने घर पहुंच जाएंगे। भरोसा ही नहीं हो रहा प्लेन से पहुंचे अपने गांव

चंदेश्वर राम भी किसान पप्पन सिंह की इस दरियादिली से गदगद हैं। बताया कि गुरुवार सुबह छह बजे दिल्ली से पटना के लिए फ्लाइट उड़ान भरी। कहा कि अप्रैल में ही घर जाने की योजना बनाई थी, मगर अब तक सफलता नहीं मिल पाई थी। उन्हें यह भरोसा नहीं हो पा रहा कि वे अपने घर पैदल चलकर नहीं, बल्कि प्लेन से पहुंचे हैं। संकट में भी मालिक ने नहीं होने दी परेशानी

फ्लाइट से घर पहुंचे दिनेश काफी खुश हैं। उन्हें खुशी है कि अपने गांव लौट आए है। कहते हैं कि कभी एहसास ही नहीं होने दिया कि मैं उनके यहां कामगार हूं। पांच अप्रैल को गांव लौटना था। इससे पहले ही देश में लॉकडाउन हो गया। संकट की इस घड़ी में भी उन्होंने सभी को मुफ्त में ही खाना खिलाया। फिर परेशानी देखते हुए हवाई जहाज से गांव भेज दिया। मालिक ने हमलोगों की हर तरह से की मदद

अर्जुन कहते हैं कि मैं अपने मालिक पप्पन सिंह का आभारी हूं। वे प्रवासी लोगों की हर तरह से मदद कर रहे। उनका बकाया चुका रहे। खाने-पीने का इंतजाम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं पटना के लिए प्लेन से रवाना हो रहा हूं तो उसे भरोसा ही नहीं हुआ। फिर, उन्होंने ने खुद पत्नी से बात की और हमारे जाने की बात बताई। किसान ने सही सलामत पहुंचा दिया गांव

प्रवीण राम ने बताया कि संकट की इस घड़ी में किसान पप्पन भाई ने हम सभी को सही सलामत घर पहुंचा दिया। हम सभी को 3-3 हजार रुपये भी दिए, ताकि किसी को घर लौटने के बाद भी परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि काम खत्म होने के बाद यह सभी अप्रैल में अपने घर जाना चाहते थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण ऐसा नहीं हो पाया। पहली बार हवाई अड्डे पर जाने का मिला मौका

महेश राम ने कहा कि पहली बार हम सभी बुधवार की रात्रि एक साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे। इससे पहले कभी भी जाने का मौका नहीं मिला था। वहां हमलोगों की जांच हुई। इसके बाद गुरुवार की सुबह फ्लाइट में सवार हुए। फ्लाइट के रवाना होने पर काफी खुशी का अहसास हुआ। मालिक ने घर पहुंचा पेश की मिसाल

अमरजीत राम ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि हवाई जहाज में बैठूंगा। हमारे मालिक ने हमारी वापसी के लिए हवाई टिकट बनवाया। हमलोगों को काफी अच्छा लगा। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं, जब मकान मालिक ने पैसे नहीं मिलने की सूरत में किराएदार को घर से बाहर निकाल दिया। या फिर मालिकों ने अपने यहां काम करने वाले मजदूरों के पैसे काट लिए। लेकिन, हमारे मालिक ने बिना कुछ बताए ही हमें सुरक्षित घर पहुंचा दिया। पांच घंटे में ही दिल्ली से पहुंच गए गांव

प्रवीण ने कहा कि मैं अपने पिता व भाई के साथ दिल्ली में काम करता हूं। पप्पन भाई कहा करते थे कि सभी लोग उनके परिवार का ही हिस्सा हैं, संकट की घड़ी में उन्होंने यह बात साबित भी कर दी है। यही नहीं, उन्होंने आगे भी सहयोग की बात कही।

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