समस्तीपुर Town

समस्तीपुर जिले में खेलों की आधारभूत संरचना बेहद कमजोर

समस्तीपुर : खेलों की आधारभूत संरचना बेहद कमजोर रहने से समस्तीपुर जिले के आधे से अधिक प्रतिभाएं उभर नहीं पाते हैं। इसके बावजूद जिले के रोविन राजा रुमौल्ड ने जूनियर अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल, अनुकूल राय ने जूनियर विश्वकप क्रिकेट एवं आकाश ठाकुर ने सबजूनियर बैंडमिटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिर्फ शिरकत ही नहीं की बल्कि शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर गौरवान्वित करने का काम किया है। इसके अलावा एथलेटिक्स के क्षेत्र में मो.शाहिद, जितेंद्र कुमार एवं संजय कुमार राय जबकि बॉलीबाल में राजेश कुमार एवं कैरम बोर्ड में राज अग्रवाल और जेड खान ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रौशन किया है। टेबल टेनिस में इकरा आफताब व अंजनी कुमार ने भी राज्य स्तर पर अपने प्रदर्शन का लोहा मनवाया है। फुटबॉलर रोबिन राजा रुमौल्ड ने अपनी उपलब्धि के पीछे अपने पिता सह राष्ट्रीय खिलाड़ी स्व.विल्सन को देते हुए कहा कि उनके कठोर अनुशासन और खेल की बारिकियों के कारण उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ। क्रिकेटर अनुकूल राय ने अपनी उपलब्धि के लिए अपने परिश्रम, स्थानीय गुरु ब्रजेश झा एवं अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक वेंकट राम के टिप्स को महत्वपूर्ण बताया। शटलर आकाश ठाकुर ने अपने गुरु नवीन कुमार को अपने खेल और उसकी उपलब्धि का मुख्य नायक बताया। बैडमिटन कोच सह बिहार बैडमिटन टीम के मैनेजर नवीन कुमार ने कहा कि बैडमिटन खिलाड़ी के लिए अगर तीन कोर्ट वाला हॉल का निर्माण हो जाए तो यहां की कई प्रतिभा राष्ट्रीय क्षितिज पर दिखाई देगा। क्योंकि यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

रोजगार तो दूर प्रोत्साहन भी नहीं मिलता

खेलों के माध्यम से सूबे की सरकार ने सशक्त एवं समृद्ध बिहार के निर्माणि के लिए मुख्यमंत्री खेल विकास योजना प्रारंभ की थी। इसके तहत उत्कृष्ट खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने की योजना बनी। मगर सरकार की यह योजना समस्तीपुर में फलीभूत नहीं हो पा रही है। जिले में विभिन्न खेलों के दर्जनों खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर अपना परचम लहराया है। मगर उन खिलाड़ियों को अब तक नौकरी मिलने की बात तो दूर प्रोत्साहन भी नहीं मिला। जिले के अधिकांश खेल संगठन के अधिकारी अपने पदों पर वर्षों से नाग की तरह फन मारे बैठे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि खेल और खिलाड़ियों का विकास उनके एजेंडा में है ही नहीं। खेलों की नर्सरी कहे जाने वाले विद्यालयों में खेल की घंटी मतलब बच्चों की छुट्टी का संकेत है। ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जिले में खेल और खिलाड़ियों को दोयम दर्जे के रूप में देखा जाता है।

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