समस्तीपुर Town

समस्तीपुर सदर अस्पताल प्रशासन उपलब्ध कराता ऑक्सीजन तो संक्रमित अधिवक्ता की बच सकती थी जान

समस्तीपुर । स्थानीय व्यवहार न्यायालय के मद्य निषेध के विशेष लोक अभियोजक कृष्ण मुरारी प्रसाद के कोरोना संक्रमण से मौत होने पर मंगलवार को वकीलों ने शोक सभा की। अध्यक्षता विश्वनाथ राय ने की। इसमें दिवंगत अधिवक्ता की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर कोरोना महामारी से बचाव को प्रशासन पर खानापूर्ति करने का आरोप लगाया। कहा कि यदि अस्पताल प्रशासन उन्हें भर्ती करता और समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराता तो उनकी जान बच सकती थी। अधिवक्ताओं ने पूरे न्यायालय परिसर में छिड़काव की मांग की। मौके पर महासचिव विमल किशोर राय, राजेंद्र झा, पूर्व सचिव पुरषोत्तम प्रसाद सिंह, राकेश कुमार चौधरी, राजेश कुमार महराज, जैनेंद्र कुमार बच्चन, कंज कुमार सिंह, राजेश कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।

व्यवहार न्यायालय के विशेष लोक अभियोजक उत्पाद का निधन वकील संघ के लिए अपूरणीय क्षति है। अब न्यायालय परिसर में अधिवक्ता को सजग होकर रहना होगा। सरकारी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज की व्यवस्था नहीं होना सरासर गलत है। वैश्विक महामारी कोरोना से बचने के लिए सभी अधिवक्ता को मास्क पहनने और फिजिकल डिस्टेंस का पालन करने की जरूरत है।

किरण सिंह, अध्यक्ष, जिला वकील संघ।

कोरोना संक्रमित अधिवक्ता को सही समय पर इलाज की सुविधा नहीं दिया जाना व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह् खड़ा करता है। सरकार दावा कर रही है कोरोना संक्रमितों का बेहतर इलाज किया जा रहा है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। अब कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उन्हें होम आइसोलेशन करते हुए खानापूर्ति की जा रही है।

विश्वनाथ राय, अधिवक्ता।

कोरोना पॉजिटिव सरकारी वकील की मौत के बाद भी परिसर में अभी तक समुचित रूप से छिड़काव नहीं कराया गया है। प्रशासन की ओर से सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। अस्पताल में भी मरीजों के लिए बेहतर इंतजाम नहीं होना पूरी तरह से व्यवस्था की पोल खोल रही है। उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों की जांच भी होनी चाहिए।

आशा देवी, अधिवक्ता।

कोरोना पॉजिटिव होने के बाद स्वास्थ्य विभाग मरीज का सही तरीके से इलाज ही नहीं करेगा तो महामारी में अधिवक्ता किस तरह काम करेंगे। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमित मरीज के लिए सभी व्यवस्था दुरुस्त रखने का दावा करती है। लेकिन कोरोना पीड़ित का समुचित इलाज नहीं होना व्यवस्था की पोल खोल रहा है।

पुरुषोत्तम प्रसाद सिंह, पूर्व सचिव, जिला वकील संघ।

वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव को लेकर सरकार का सभी तरह का दावा पूरी तरह से फेल है। मरीज के संक्रमित होने के बाद सही समय पर उनका इलाज नहीं किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से संक्रमित को सिर्फ होम क्वारंटाइन करने अपनी ड्यूटी निभाई जा रही है।

चंदन कुमार झा, अधिवक्ता। कोरोना संदिग्ध होने की स्थिति जांच के लिए सैंपल लिया जाता है। उसकी रिपोर्ट देने में तीन से चार दिन तक लग जाती है। रिपोर्ट आने तक मरीज का किसी तरह का इलाज नहीं किया जाता है। ऐसे में उनकी स्थिति और भी अधिक बिगड़ जाती है। स्वास्थ्य प्रशासन को अपनी कार्यशैली में बदलाव लाना होगा।

सुमित कुमार, अधिवक्ता।

सरकारी अधिवक्ता का कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद उन्हें होम क्वारंटाइन कर दिया गया था। जबकि, होम क्वारंटाइन की अवधि में मेडिकल टीम ने एक बार भी जांच करना मुनासिब नहीं समझा। जब स्थिति बिगड़ी तो परिजन स्वयं उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अधिवक्ता के निधन के बाद अभी तरह छिड़काव भी नहीं कराया गया है।

बलिराम भगत, अधिवक्ता।

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