समस्तीपुर Town

कोरोना से जंग में योद्धा साबित हो रही रेडक्रॉस

समस्तीपुर । कोरोना वायरस जैसा अदृश्य दुश्मन जानलेवा साबित हो रहा। कुछ लापरवाही, कुछ बेपरवाही से संक्रमण जाल फैलता जा रहा। हर ओर लोग सहमे हैं। और, ऐसी ही जंग में रेडक्रॉस सोसाइटी योद्धा साबित हो रही। कोरोना के संक्रमण को रोकने की जंग बिलकुल अलग तरीके की है। इसका वायरस कब, कहां और कैसे हमला कर दे, पता लगा पाना मुश्किल है। देश-दुनिया के विशेषज्ञ दिन-रात माथापच्ची कर रहे। मौजूदा हालात में कोरोना को हराने का एकमात्र हथियार सतर्कता है। ऐसी ही आपात परिस्थितियों से लड़ने के लिए गठित की गई रेडक्रॉस सोसाइटी की सक्रियता नजर आती है। रेडक्रॉस द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जा रहा। लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक भी किया जा रहा। संस्था लोगों को कैंसर, एनीमिया, थैलीसीमिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव के तरीके के बारे में जागरूक कर रही। गर्व से शताब्दी वर्ष मनाने का मौका :

रेडक्रॉस के संस्थापक जीन हेनरी ड्यूनेंट के जन्मदिन आठ मई का विश्व रेडक्रॉस दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में रेडक्रॉस सोसाइटी की स्थापना 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के तहत की गई थी। कोरोना के खिलाफ जंग में रेडक्रॉस को उतार इस शताब्दी वर्ष को शान से मनाने का मौका भी है।

लोगों की मदद के लिए आ रहे आगे

रेडक्रॉस के सचिव वीडी केशव का कहना है कि अभी तक 1500 से अधिक लोगों को सूखी राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई है। ब्लड बैंक में रक्त की कमी न हो, इसके लिए शारीरिक दूरी का पालन करते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। ताकि, मरीजों को किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न नहीं हो सके। बाहरी प्रदेश से लौटे लोगों को बिस्कुट व पानी भी उपलब्ध कराई गई। उन्हें जांच के बाद घर तक पहुंचाने में वाहन की सुविधा भी उपलब्ध करा रहे।

प्रतीक चिह्न

सफेद पट्टी पर लाल रंग का क्रॉस का चिह्न इस संस्था का निशान है। संस्था ने वर्ष 1937 ई. में विश्व का पहला ब्लड बैंक अमेरिका में खोला था। थैलेसीमिया, कैंसर, एनीमिया, एड्स जैसी घातक बीमारियों के रोगियों को यह संस्था मदद करती है। रेडक्रॉस के सिद्धांत

जानकारों के मुताबिक, रेडक्रॉस मानवता, तटस्थता, स्वतंत्रता, एकता, निष्पक्षता और सर्वभौमिकता को अपना सिद्धांत मानती है। इसका उद्देश्य मदद और चिकित्सा, दुनिया के अधिकाधिक देशों में प्रसार, समन्वय, बिना भेदभाव सेवा आदि हैं।

स्थापना का उद्देश्य

इसकी शुरुआत छोटे रूप में हुई। लेकिन, धीरे-धीरे इसकी उपयोगिता बढ़ी। अनेक देशों की सरकारों ने इसे सहयोग किया। एक संहिता बनी कि रेडक्रॉस वाहनों को कोई नहीं रोकेगा। सरकारों का भी साथ मिला। आज, रेडक्रॉस काफी सम्मानजनक स्थिति में है और दुनिया के विभिन्न देशों में चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध करा रही है। भारत में रेडक्रॉस की स्थापना ने आज वर्ष 2020 में सौ वर्ष पूरे कर लिए हैं। अब तक यहां सात सौ से अधिक जिला और उपजिला शाखाएं हैं।

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