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महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल! इस वजह से आ सकती है 1 लीटर के भाव में बड़ी तेजी

पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है. आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है. पिछले ढ़ाई महीने से लॉकडाउन के चलते पेट्रोल की कीमतें स्थिर हैं. हालांकि, कुछ राज्यों ने राजस्व के लिए VAT में बढ़ोतरी की है. लेकिन, अब तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. दरअसल, क्रूड की बढ़ती कीमतें और आने वाले दिनों में OPEC की तरफ से होने वाले फैसला का असर इस पर पड़ेगा. 

कच्चे तेल का उत्पादन और एक्सपोर्ट करने वाले संगठन OPEC की इस हफ्ते बैठक होने वाली है. हालांकि, OPEC की पहले से ही 9 जून को बैठक तय है. लेकिन, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि बैठक तय तारीख से पहले हो सकती है. बैठक का मुख्य मुद्दा कच्चे तेल (Crude Oil Price) है. दरअसल, OPEC अगले कुछ महीनों के लिए उत्पादन में कटौती पर फैसला कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों जोरदार उछाल देखने को मिल सकता है.

बैठक में प्रोडक्शन कट की खबर से तेल कीमतों में तेजी दिखाई दी है. ब्रेंट क्रूड में करीब 1 फीसदी की तेजी देखने को मिली थी. पहले ही OPEC की तरफ से जारी कटौती के चलते पिछले 6 हफ्तों में ब्रेंट क्रूड का दाम दोगुना हो चुका है. हालांकि, ब्रेंट और WTI क्रूड का भाव पिछले साल की तलुना में 40 फीसदी नीचे है. अगर उत्पादन में कटौती का फैसला होता है तो पेट्रोल-डीजल के भाव पर इसका सीधा असर दिखाई देगा. 

बता दें कि भारत अपनी जरूरत के 83 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. इसके लिए हर साल 100 अरब डॉलर चुकाने पड़ते हैं. कमजोर होते रुपये के कारण भारत का आयात बिल और बढ़ सकता है. आयात बिल की भरपाई करने के लिए सरकार टैक्स दरें ऊंची रखती है.

बढ़ा सकते हैं उत्पादन कटौती की मियाद
ओपेक और सहयोगी देश की 9 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीटिंग होनी है. इसमें जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल के उत्पादन कटौती को जारी रखा जा सकता है. बता दें, 1 अप्रैल को ओपेक और सहयोगी देशों ने 30 जून तक रोजाना 97 लाख बैरल क्रूड उत्पदान की कटौती का ऐलान किया था. यह प्रोडक्शन में अब तक की सबसे बड़ी कटौती है. साथ ही दुनिया में कुल क्रूड उत्पादन का करीब 10 फीसदी है. इसी वजह से पिछले कुछ दिनों से क्रूड के दाम लगातार चढ़े हैं.

कीमतों में आ सकती है तेजी
पिछले 6 हफ्तों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें दोगुनी हो गई हैं. दरअसल, ओपेक देशों और सहयोगी देशों मसलन रूस आदि ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती जारी रखी है. इसके चलते क्रूड कीमतों को सपोर्ट मिला है. अगर आगे भी कटौती जारी रखने पर फैसला होता है तो क्रूड के भाव 44 डॉलर तक जा सकता है. सीनियर एनालिस्ट मानते हैं कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका सीधा असर होगा. क्योंकि, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपया क्रूड के भाव में आई इस तेजी को संभाल नहीं पाएगा. 

क्रूड की कीमतें बढ़ी तो महंगा होगा पेट्रोल-डीजल
एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोल के दाम कई चीजों से तय होते है. इसमें कच्चे तेल सबसे पहले है. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतें बढ़ने पर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ता है. हालांकि, क्रूड में गिरावट का बहुत ज्यादा असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ता. इसका कारण है कि भारत में पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगता है. वहीं, दूसरी वजह डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी है. आपको बता दें कि पेट्रोल पर फिलहाल 19.98 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगती है. वैट के तौर पर 15.25 रुपये वसूले जाते है.

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