समस्तीपुर Town

अपनी माटी में सहेजेंगे दर्द, धैर्य के साथ समस्तीपुर लौट रहे प्रवासी

समस्तीपुर । कोरोना ने ऐसा सितम ढाया कि परदेस में छिन गई नौकरी-चाकरी। बेरोजगारी की वजह से ऐसे दिन भी देखने पड़े कि भोजन तक के लिए मोहताज हो गए। अब घर लौटने के अलावा और कोई अन्य चारा भी तो नहीं था। स्पेशल ट्रेन से आने की इजाजत मिली तो जैसे-तैसे चल दिए घर की ओर। लेकिन, विपत्ति की इस घड़ी में ट्रेन में भी भूखे-प्यासों की सुध लेनेवाला कोई हमदर्द नहीं मिला। बस अब इसी धैर्य के सहारे सफर पर निकले हैं कि जल्दी ही अपने परिवार तक जरूर पहुंचेंगे। भले ही क्वारंटाइन के बाद ही सही। कम से कम परदेस की बेरुखी तो देखने को नहीं मिलेगी। यही बात मन को तसल्ली दे रही है।

महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में फंसे प्रवासियों को लेकर एक स्पेशल ट्रेन-09317 बुधवार करीब चार बजे समस्तीपुर पहुंची। यहां उस ट्रेन का इंजन बदला गया। करीब आधा घंटा बाद ट्रेन दरभंगा के लिए रवाना हो गई। समस्तीपुर में ट्रेन के पहुंचते ही आरपीएफ ने अपनी चौकसी बढ़ा दी। इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि कोई उतर न सके। इच्छुक यात्रियों को यहां सशुल्क पानी की बोतल, केक, बिस्कुट आदि उपलब्ध कराए गए। इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी समेत और रेल पुलिस के जवान मौजूद रहे। इसके पूर्व जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ स्टेशन का जायजा भी लिया। 24 कोच वाली इस ट्रेन में बैठे एक यात्री ने बताया कि नंदूड़बाग स्टेशन से टिकट लेने के बाद ही यात्रियों को ट्रेन में बिठाया गया। न कहीं खाना मिला न पानी। समस्तीपुर में पानी की सुविधा मिलने से यात्रियों ने काफी राहत महसूस की। बता दें कि दो दिनों में यह चौथी ट्रेन समस्तीपुर पहुंची। इसमें एक भी ट्रेन यहां नहीं रुकी। जिलाधिकारी ने ली सैनिटाइजेशन व्यवस्था की जानकारी जिलाधिकारी शशांक शुभंकर स्टेशन पर पुलिस अधीक्षक समेत तमाम वरीय अधिकारियों के साथ पहुंचे थे। यहां उन्होंने स्टेशन पर चल रहे सुरक्षात्मक उपायों की जानकारी ली। वहीं, सैनिटाइजेशन व्यवस्था को भी तलाशा। उन्होंने रेलवे के वरीय स्वास्थ्य निरीक्षक एनके दास से सैनिटाइजेशन के लिए बनाए गए घोल के बारे में भी पूछा। संभावना जताई जा रही है कि प्रवासियों को लेकर एक-दो दिन में एक और ट्रेन यहां आएगी। उनके साथ पुलिस अधीक्षक विकास वर्मन समेत रेलवे के भी कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

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