समस्तीपुर Town

समस्तीपुर : कोरोना से भी खतरनाक कई बीमारियां, भारी पड़ सकती लापरवाही

समस्तीपुर । कोविड-19 का संक्रमण चरम पर है। जिले में संक्रमितों की संख्या 350 के आसपास पहुंच गई है। हालांकि, इनके लक्षण को देखकर बहुत घबराने जैसी स्थिति नहीं है। क्योंकि, इनमें प्रभावी लक्षण नहीं दिखते। प्रारंभिक जांच कर चुकी मेडिकल टीम कहती है कि अधिकतर एसिप्टोमेटिक हैं। इनमें प्रारंभिक लक्षण जैसे खांसी, बुखार, कफ या सांस लेने में तकलीफ जैसी कोई बात नहीं है। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें आइसोलेट किया जा रहा। इस अवधि में उनके लक्षणों की पड़ताल की जाती है।

डॉ. आरबी शर्मा कहते हैं कि कोरोना को लेकर लोगों में चिता है कि इसकी दवा या वैक्सीन नहीं है। लेकिन, जिसकी दवा है, उससे भी मौत कम नहीं है। जिले में कोरोना और अन्य बीमारियों से हुई मौत की तुलना कर लीजिए। कोरोना से अब तक दो मौत हुई हैं। दोनों ही मामलों में पीड़ित संक्रमण के अलावा अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। दूसरी ओर यह भी देखिए कि जिले में संक्रमितों के ठीक होने की दर बेहतर है। 200 से अधिक संक्रमित रिकवर कर चुके हैं। शेष का स्वास्थ्य भी सामान्य है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं की कोरोना को कमतर समझा जाए। अभी व्यावहारिक उपाय है कि हम समस्त सतर्कता, जागरूकता, चैतन्यता और इम्यून के अपेक्षित उच्च स्तर को कायम या बरकरार रखते हुए कोरोना के साथ वैसे ही जीने का अभ्यास शुरू करें, जैसे टीबी, चिकन पॉक्स या खसरा, मलेरिया, कालाजार, डेंगू या चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के साथ करते रहे हैं।

इससे पहले झेल चुके कई त्रासदी

कोरोना की संक्रामकता जो हो, पर यह एकमात्र त्रासदी नहीं है। इसके पूर्व भी लोग बड़ी बीमारियों को झेल चुके हैं। जिले के बुजुर्ग बताते हैं कि प्लेग, चेचक, टीबी और हैजा आदि से होनेवाली मौत के मंजर को भी देखा है। गांव के गांव साफ हो जाया करते थे। उस समय दवा तक नहीं थी। शव उठाने वाले भी नहीं मिलते। जितवारपुर चौथ निवासी बुजुर्ग रामेश्वर राय बताते हैं कि उस जमाने में जब दवा नहीं थी, तब भी जिन लोगों ने परहेज किया, वे बचे। इस बीमारी में वैसा ही है।

अभी और बढ़ेगी प्रतिरोधक क्षमता

डॉ. गिरीश कुमार कहते हैं कि ग्रामीण और शहरी परिवेश में अंतर होता है। जीवनशैली अहम फैक्टर है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में रोगों से लड़ने की व्यापक क्षमता होती है। ये वायरस और बैक्टीरिया से किसी भी परिस्थिति में निपट लेते। इसका कारण इनमें इम्यून सिस्टम और एंटीबॉडी बेहतर होना है। यही उनके लिए कवच साबित हो जाती है। कोरोना मामलों को देखनेवाले डॉक्टर भी यही कहते हैं कि आनेवाले दिनों में इस संक्रमण के प्रति हमारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। क्योंकि, तब मानव शरीर इस वायरस के प्रति संतुलन स्थापित कर लेगा।

मौत के लिए अन्य बीमारियां भी जिम्मेदार

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अमरेंद्र नारायण शाही का कहना है कि हाल के दिनों में कोरोना निश्चित खतरनाक साबित हो रहा। लेकिन, चुनौती तो अन्य बीमारियों को लेकर भी है। मौत के लिए वे बड़े कारक हैं। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों में होनेवाली एईएस की भयावहता से आप समझ सकते। कैंसर, हृदय रोग से होनेवाली मौत के आंकड़ों को देखिए। क्या कैंसर कोरोना से कम घातक है। तेजी से बढ़ते उसके ग्राफ को देखिए। इधर, 2020 में नगर परिषद में 100 से अधिक लोगों के स्वजन ने मृत्यु पंजीयन के लिए आवेदन दिया था। इनमें एक तिहाई मौत हृदय रोग से ही हुई है, जबकि 10 फीसद लोगों की मौत कैंसर से भी मौत हुई है।

Share This Post