समस्तीपुर Town

समस्तीपुर में पहुंचा टिड्डियों का दल, किसानों की बढ़ी चिंता

समस्तीपुर । जिले के कई प्रखंडों में बुधवार की शाम टिड्डियों के दल ने दस्तक दी। ये शाम करीब छह बजे के बाद विभिन्न प्रखंडों में घुस गए। पूसा, ताजपुर, कल्याणपुर और वारिसनगर में लाखों की संख्या में देखा गया। टिड्डियों के आकाश में उड़ते देख किसानों में हड़कंप मच गया। लोग तत्काल थाली, टीन, डब्बा आदि पीटकर इन्हें भगाने का प्रयास करने लगे। वारिसनगर प्रखंड विकास पदाधिकारी अजमल परवेज ने बताया कि किसान सलाहकार व समन्वयक को संबंधित स्थिति का मुआयना करते हुए उचित ढंग से कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। उन्होंने जल्द ही टिड्डी दल के आक्त्रमण व बचाव के लिए जनप्रतिनिधियों सहित किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए बैठक बुलाने की बात कही। डीएओ ने बताया कि लाखों की संख्या में टिड्डियों ने फसलों पर हमला कर दिया है। विभाग की ओर टिड्डियों को भगाने के लिए पहले से तैयारी की गई थी। चंदौली के किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि टिड्डियों का दल ढैंचा, गन्ना, धान बिचड़े आदि को नुकसान पहुंचा रहा।

उन्होंने बताया कि किसान अपनी समझ के अनुरूप छिड़काव कराए हैं। बारिश के कारण छिड़काव करने में भी दिक्कत आ रही। ट्रैक्टर का सायलेंसर खोलकर शोर मचाया जा रहा है। पटाखा फोड़ने के साथ लाउडस्पीकर पर आवाज, थाली-ढोल बजाया जा रहा। लोगों से भी ऐसा करने की अपील की जा रही है। टिड्डियों को देख सकते में किसान

टिड्डियों को देखकर किसान सकते में हैं। इतना बड़ा टिड्डियों का दल उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। चंदौली के सुमंत कुमार शर्मा, रोहुआ के किसान सुबोध ठाकुर, रितेश कुमार, जुगनु, सुदर्शन ठाकुर, चन्द्रमोहन ठाकुर, बरियारपुर के अर्जुन सिंह, दिलीप कुमार, संजीव कुमार सिंह, गोही के यशवंत कुमार ठाकुर, विपिन कुमार ठाकुर, डरसुर के परवेंद्र कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह, कसोर के संजय कुमार सिंह, सोना सिंह, डॉ. ज्ञानेंद्र, शभू सिंह, धनहर के गणेश राय आदि ने बताया कि वे खेत में धान की रोपनी को देखने गए थे। इसी दौरान आकाश में टिड्डियों का विशाल दल दिखा। कृषि विभाग द्वारा दिए गए सुझाव टिड्डी दल किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है। टिड्डिया एक दिन में 100 से 150 किमी की दूरी तय कर सकती हैं। हालाकि, इनके आगे बढ़ने की दिशा हवा की गति पर निर्भर करती है। यह दल 15 से 20 मिनट में फसल की पत्तियों को पूर्ण रूप से खाकर नष्ट कर सकता है। टिड्डी दल किसी क्षेत्र में शाम छह से आठ बजे के आस-पास पहुंचकर अलग-अलग समूह में जमीन पर बैठ जाते हैं। टिड्डी दल शाम के समय समूह में पेड़ों, झाड़ियों एवं फसलों पर बसेरा करता है। सुबह आठ से नौ बजे के करीब उड़ान भरता है। आक्त्रमण से इस प्रकार बचें

1. टिड्डी दल का समूह जब भी आकाश में दिखाई पड़े तो उन्हें उतरने से रोकने के लिए तुरंत अपने खेत के आस-पास मौजूद घास-फूस का उपयोग करके धुआ करें। 2. टिड्डी दल के दिखाई देते ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर उनकों अपने खेत पर बैठने न दें। अपने खेतों में पटाखे फोड़कर, थाली बजाकर, ढोल-नगाड़े बजाकर आवाज करें। कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर के टिड्डियों और उनके अंडों को नष्ट किया जा सकता। इन कीटनाशकों का कर सकते इस्तेमाल

1. टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफास 20 फीसद ईसी या बेंडियोकार्ब 80 फीसद 125 ग्राम 1200 मिली या क्लोरपाइरीफास 50 फीसद ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 फीसद ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 फीसद एससी 1400 मिली या डाइफ्लूबेनज्यूरॉन 25 फीसद डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 फीसद ईसी 400 मिली या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 10 फीसद डब्ल्यूपी 200 ग्राम प्रति हैक्टेयर कीटनाकों का उपयोग किया जा सकता है। 2. मैलाथियान 5 फीसद धूल अथवा फेनवेलरेट धूल की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से डस्टर द्वारा बुरकाव करें।

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