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Lockdown 4: शॉपिंग मॉल और स्कूल-कॉलेज दो और हफ्ते बंद रहेंगे, स्टेडियम खुल सकेंगे लेकिन दर्शकों की एंट्री बंद रहेगी

नई दिल्ली. भारत में दुनिया का सबसे बड़ा लॉकडाउन 14 और दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। यह देशबंदी का चौथा फेज होगा, जो सोमवार 18 मई से शुरू होगा और 31 मई को खत्म होगा। रविवार को लॉकडाउन का तीसरे फेज खत्म होने से करीब छह घंटे पहले राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीएमए ने केंद्र सरकार और राज्यों को देशबंदी जारी रखने के निर्देश दिए।  इसके बाद गृह मंत्रालय ने नई गाइडलाइंस जारी कर दीं।

लॉकडाउन 31 मई तक बढ़ने के साथ ही सवा सौ करोड़ की आबादी अब लगातार 68 दिन तक बंदिशों में रहेगी। दुनिया के किसी भी देश में इतनी बड़ी आबादी के साथ इतने दिनों तक चलने वाला यह सबसे बड़ा लॉकडाउन है।श्

नई गाइडलाइंस : 31 मई तक क्या खुला रहेगा?

  • अगर राज्य सरकारों के बीच आपसी सहमति बन जाती है तो दो राज्यों के बीच यात्री बसों और गाड़ियों की आवाजाही हो सकेगी।
  • सरकारें अपने स्तर पर फैसला कर राज्यों के अंदर भी बसें शुरू कर सकेंगी।
  • स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम खुल सकेंगे, लेकिन दर्शकों की इजाजत नहीं होगी।
  • रेस्टोरेंट्स से आप सिर्फ होम डिलिवरी के लिए खाना मंगवा सकेंगे। होम डिलिवरी करने वाले रेस्टोरेंट्स को किचन शुरू करने की इजाजत दी गई है।
  • सिर्फ वही होटल चालू रहेंगे, जहां हेल्थ, पुलिस, गवर्नमेंट ऑफिशियल्स, हेल्थ वर्कर्स और लॉकडाउन की वजह से फंसे पर्यटक रह रहे हैं।
  • बस डिपो पर चलने वाले कैंटीन और रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट्स पर चलने वाली खाने-पीने की दुकानें खुली रहेंगी। 

31 मई तक क्या बंद रहेगा?

  • अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्री उड़ानें बंद रहेंगी। मेट्रो रेल भी अभी शुरू नहीं होंगी।
  • सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिएटर, ऑडिटोरियम, असेंबली हॉल बंद रहेंगे।
  • स्कूल, कॉलेज, एजुकेशन, ट्रेनिंग, कोचिंग इंस्टिट्यूट भी 31 मई तक बंद रहेंगे। ऑनलाइन डिस्टेंस लर्निंग चलती रहेगी।
  • होटल और बार बंद रहेंगे। 
  • हर तरह के राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रमों और जमावड़ों पर रोक जारी रहेगी।

ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन अब राज्य खुद तय करेंगे

  • राज्य सरकारें खुद ही ग्रीन जोन, ऑरेंज जोन और रेड जोन तय करेंगी। उन्हें सिर्फ केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के पैरामीटर्स का ध्यान रखना होगा। 
  • रेड और ऑरेंज जोन के अंदर जिला प्रशासन कंटेनमेंट जोन और बफर जोन तय करेगा। 
  • कंटेनमेंट जोन में पहले की तरह सिर्फ जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी। 
  • इन जोन्स के अंदर या बाहर लोगों की आवाजाही न हो, इसका सख्ती से पालन करना होगा। 
  • कंटेनमेंट जोन के अंदर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और घर-घर जाकर सर्विलांस बढ़ाना होगा।

रात का कर्फ्यू जारी रहेगा
शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक लोग किसी तरह की आवाजाही नहीं कर सकेंगे। जरूरी सेवाओं पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। स्थानीय प्रशासन इस बारे में जरूरी आदेश जारी कर सकता है। 

बच्चों-बुजुर्गों को घर में रहना होगा 
65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, पहले से बीमार लोग, ग‌र्भवती महिलाएं और 10 साल से कम उम्र के बच्चों को घर में ही रहना होगा। इलाज या बेहद जरूरी काम से ही घर से निकल सकेंगे।

आरोग्य सेतु का इस्तेमाल और जरूरी सेवाओं के लिए आवाजाही

  • दफ्तरों में आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल तय करना होगा। हर कर्मचारी के फोन पर यह इंस्टॉल होना चाहिए। जिला प्रशासन लोगों को यह ऐप इंस्टॉल करने की सलाह दे सकता है। 
  • लोगों को इस पर अपना हेल्थ स्टेटस अपडेट करना होगा। इससे उन लोगों को फौरन मदद मिल सकेगी, जिन्हें संक्रमण होने का खतरा है।
  • सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे मेडिकल प्रोफेशनल्स जैसे, डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मचारियों और एम्बुलेंस की आवाजाही होने दें। इसमें रुकावट नहीं आनी चाहिए।
  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सामान ढुलाई करने वाले ट्रक या अन्य वाहनों की आवाजाही सुनिश्चत करनी होगी। इसमें खाली ट्रक भी शामिल होंगे। 

कैसे रहे लॉकडाउन के तीन फेज

देश में अब तक तीन फेज में 25 मार्च से 14 अप्रैल, 15 अप्रैल से 3 मई और 4 मई से 17 मई तक लॉकडाउन घोषित किया गया था। 

  • पहला फेज: 25 मार्च से 14 अप्रैल तक, यह 21 दिन का रहा। इस दौरान सिर्फ जरूरी सामान की दुकानें खोलने की इजाजत दी गई। 
  • दूसरा फेज: 15 अप्रैल से 3 मई, यह 19 दिन का रहा। हॉटस्पॉट (रेड जोन) को छोड़कर ऑरेंज और ग्रीन जोन में दुकानें खोलने की परमिशन दी गई। 
  • तीसरा फेज: 4 मई से 17 मई, यह 12 दिन का था। हॉटस्पॉट (रेड जोन) को छोड़कर ऑरेंज और ग्रीन जोन में दुकानें खोलने की परमिशन दी गई। इसके अलावा, प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेनें और बस चलाई गईं। नई दिल्ली से स्पेशल ट्रेनों की भी शुरुआत हुई। वंदे भारत और समुद्र सेतु मिशन के जरिए दूसरे देशों में फंसे भारतीयों की वापसी की शुरुआत हुई।
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