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Lockdown: किसी दूसरे शहर फंसे हैं तो क्या करें, अपने घर तक कैसे पहुंचे? यहां जानिए सबकुछ

कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी. खासकर उन लोगों की जो अपना गांव-घर छोड़कर दूसरे शहरों में फंसे हैं. लॉकडाउन के कारण ऐसे लोगों के रोजगार पर ताला लग गया है और उनके पास घर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं बचा. लोगों ने पैदल यात्रा शुरू की और अपने शहर की तरफ रवाना हो गए. दूर-दराज का सफर में कुछ दम भी तोड़ गए. लेकिन, इन मजबूरों लोगों का जिम्मा राज्यों ने उठाया. प्रदेश सरकारों ने ऐसे मुसाफिरों की मदद का ऐलान किया है. तत्काल हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए. नोडल अधिकारी की नियुक्ति हुई. बसों और ट्रेन की व्यवस्था की गई. यहां तक की ऑनलाइऩ पोर्टल भी शुरू कर दिया गया. लेकिन, फिर आम आदमी को यह नहीं पता कि वो घर कैसे लौटेगा?

आइए आपको मुंबई जैसे शहर का उदाहरण देकर बताते हैं कि शहर से बाहर अपने गृह राज्य तक आप कैसे पहुंच सकते हैं.

पहला कदम
सबसे पहले मुंबई पुलिस का एप्लिकेशन फॉर्म भरें. ये फॉर्म पुलिस स्टेशन से लेने के बजाय किसी की मदद से इंटरनेट के जरिए हासिल करें तो बेहतर होगा.

मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत कब?
अगर सड़क के रास्ते या प्राइवेट गाड़ी से जाना चाहते हैं तो मेडिकल सर्टिफिकेट हासिल करें. जबकि ट्रेन से जाने वालों के लिए सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं.

फॉर्म जमा करने के लिए तीन अलग लाइनें
फॉर्म को जमा करने के लिए आम तौर पर पुलिस थाने में ट्रेन, सड़क और निजी वाहन से जाने वालों की तीन अलग लाइन है.

क्या है पूरी प्रक्रिया ?
एप्लिकेशन फॉर्म जमा होने के बाद पुलिस सभी की कंप्यूटर में डेटा एंट्री करने के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश झारखंड, कोलकाता और उड़ीसा जैसे राज्यों के नोडल ऑफिसर से इजाजत लेती है. रेलवे के साथ कनॉर्डिनेट करती है. ट्रेन छूटने की जगह और समय तय होने के बाद रजिस्टर्ड लोगों को फोन करके बुलाया जाता है. मेडिकल जांच कर ट्रेन में रवाना किया जाता है. दूसरे राज्यों से परमिशन मिलने के बाद मुंबई से निजी वाहन से जाने वालों को तुरंत परमिशन दी जाती है. सरकारी बस का इंतजाम होने पर सड़क से जाने वालों को इजाजत दी जाती है, जबकि भारतीय रेल से को कॉर्डिनेट करने में थोड़ा समय ज़रूर लगता है.

गुजरात या राजस्थान जाना चाहते हैं?
अगर आप गुजरात या राजस्थान जाना चाहते हैं तो ये प्रोसेस थोड़ा आसान है. क्योंकि, मुंबई पुलिस को इन राज्यों के नोडल ऑफिसर से इजाजत की आवश्यकता नहीं. ऐसे में अगर आपके पास निजी वाहन है तो आप जल्द से जल्द शहर छोड़ सकेंगे. सरकारी बस या ट्रेन का इंतजाम होने तक थोड़ा और समय जरूर इंतजार करना पड़ सकता है.

अगर आपके पास निजी वाहन नहीं है तो?
अगर आपके पास निजी वाहन नहीं है और आप जल्द अपने गंतव्य पर लौटना चाहते हैं तो आप सरकारी बस या ट्रेन पर निर्भर होने के बजाय आपस में (कम से कम 25 लोगों का) एक ग्रुप बनाकर किराए की बस का इंतजाम करें. अपने में से किसी एक को ग्रुप का मुखिया चुनें और अपने ग्रुप की जानकारी एक पेनड्राइव में लेकर एप्लिकेशन और मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे. इससे पुलिस का प्रक्रिया में लगने वाला काफी वक्त बचेगा और आपको भी बिना किसी तकलीफ़ के जल्द से जल्द मदद मिल सकेगी.

यहां देखिए किस राज्य के लिए कौन सा हेल्पलाइन नंबर आएगा काम…
Helpline number list

ये जानकारी देना होगी
इस ऑफलाइन और ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदक को नाम, स्थानीय पता, उम्र, काम, पुरानी बीमारी की जानकारी सहित दूसरी महत्वपूर्ण जानकारी देना होगी. ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत आवेदक को स्थानीय जिला प्रशासन से संपर्क कर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. ठीक इसी तरह का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन फॉर्म भरकर भी किया जा रहा है.

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