दलसिंहसराय

जिले में प्रति घंटे एक सेमी की रफ्तार से बढ़ रही गंगा, तटवासियों में भय

समस्तीपुर। गंगा के जलस्तर में इन दिनों धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल दलसिंहसराय के सरारी कैंप पर प्रतिनियुक्त कनीय अभियंता जीतेश रंजन से मिली जानकारी के अनुसार जलस्तर बढ़ने की रफ्तार शुक्रवार को प्रति घंटे एक सेमी का है। फिलहाल गंगा का जलस्तर 4281 सेमी पर है। यह जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 269 सेमी नीचे है। गौरतलब हो कि दियारा क्षेत्र के लिए गंगा में खतरे का निशान 4550 सेमी पर लगाया गया है। जलस्तर बढ़ने का रफ्तार भले ही धीमी है मगर यह खतरे के निशान के करीब पहुंचता जा रहा है। इसे देखकर तटवासियों में भय व्याप्त होने लगा है। तटवर्ती क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों का कहना है कि इस बार समय से पहले ही गंगा में जलस्तर काफी ऊपर है। जलस्तर ऊपर आने से लोगों के मन में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। जलस्तर पर इस क्षेत्र के लोग पैनी नजर रखते हैं। दियारा क्षेत्र में निवास करने वाले विमल कुमार राय उर्फ भोथा राय, वीरेंद्र राय, राकेश कुमार राय, अमन कुमार सुमन, अजय राय आदि ने बताया कि 4550 सेमी पर गंगा का तट लबालब भर जाता है। इससे ऊपर होने पर गंगा अपने तट से बाहर की ओर बहने लगती है। 4575 से 4600 सेमी जलस्तर हो जाने पर पानी निचले भू-भागों में फैलने लगता है। इससे चीना, सामा, कौनी के अलावा परवल आदि फसलों को नुकसान होता है। 4650 सेमी के करीब जलस्तर पहुंचने से ढाबों, नालों, सोतों और मरगंग में पानी भरने लगता है। इससे आगे होने पर बांध के दक्षिण बसे आबादी वाले इलाकों में पानी का फैलाव होने लगता है जिससे मकई, जनेरा, नेनुआ, झिगुनी आदि फसल बर्बाद हो जाते हैं। 4700 सेमी के पास जलस्तर पहुंचने पर लोगों के घरों के आसपास पानी का जमाव शुरू हो जाता है जो धीरे-धीरे बाढ़ के रूप में परिवर्तित होने लगता।

बांध के नीचे बसे हैं पांच पंचायत

मोहनपुर के पांच पंचायत-राजपुर, डुमरी दक्षिणी, बिशनपुर बेरी पंचायत का मटिऔर क्षेत्र, बघड़ा पंचायत का बरियारपुर एवं कुतुबपुर क्षेत्र और धरणीपट्टी पश्चिम पंचायत का हरदासपुर एवं सरसावा क्षेत्र बांध के नीचे बसा हुआ है। इन गांव में रहने वाले लोगों को प्रतिवर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ती है। बाढ़ के समय इन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है फिर भी पूर्वजों के अर्जित कृषि योग्य भूमि से मिलने वाले अन्न के लिए वे बांध के नीचे ही वर्षों से निवास कर रहे हैं। बांध के नीचे बसने के बावजूद सरकार की ओर से उन्हें यातायात की अच्छी सड़क की सुविधा है। लोग पक्के मकानों में जीवन बसर कर रहे हैं। लेकिन बाढ़ से घिर जाने के बाद उन्हें एक मात्र नौका की जोखिम भरी सवारी करनी पड़ती है। दूसरी ओर बाढ़ से इनके खेत पट जाने के कारण इन्हें रबी की अच्छी पैदावार होती है। रबी की अच्छी उपज बाढ़ की त्रासदी को भूलने के लिए उन्हें विवश करता है। बाढ़ से निपटने के लिए तैयार है प्रशासन गंगा नदी में बढ़ रहे जलस्तर और संभावित बाढ़ से निपटने की लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। एक तरफ कटाव निरोधी बंडाल और बांध की सुरक्षा के लिए क्षतिग्रस्त स्थलों पर मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया। वहीं फ्लडफाइटिग करने के लिए जीओ बैग में बालू भरकर स्टोर किए जा रहे हैं। दूसरी ओर अचंल की ओर से आपदा से निपटने के लिए नौका का निबंधन का कार्य बहुत पहले से किए जाने की सूचना है। स्थानीय तौर पर आपदा के पदाधिकारी अंचलाधिकारी को बनाया गया है। मगर उनका सरकारी मोबाइल जल्दी पकड़ता ही नहीं। पता नहीं आपदा के समय लोग अपनी समस्या उनतक कैसे पहुंचा पाएंगे। इधर, शुक्रवार को पटोरी अनुमंडलाधिकारी मो. शफीक ने तटबंधों का निरीक्षण करने रसलपुर पहुंचे। उन्होंने कई स्थलों का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। मौके पर बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कनीय अभियंता जितेश रंजन, आनंद प्रकाश एवं जीतेंद्र दास आदि मौजूद थे।

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