समस्तीपुर Town

हर रोजेदार को रहता ईद का इंतजार, देती खुशी का पैगाम

समस्तीपुर। हर रोजेदार को ईद का इंतजार रहता है। इस बार भी उनके घरों में जोर-शोर से तैयारी चल रही। सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोग एक-दूसरे को खुशी का पैगाम भेज रहे। हालांकि, इस बार सबकुछ बदला-बदला सा है। लॉकडाउन के साए में पूरा रमजान बीत गया। इस दौरान लोगों ने अपने घरों में ही नमाज अदा की। इस बार ईद की नमाज भी ईदगाह में नहीं होगी। खुद उलेमा ने इसके लिए अपील कर रखी है। बुजुर्गों ने भी कहा कि यह पहली ईद होगी, जिसमें न तो लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ेगे, न किसी के घर जाएंगे, न एक-दूसरे से हाथ और गले मिलाएंगे। कहते हैं कि शहर की बड़ी मस्जिद में हर साल अलविदा की नमाज में रौनक देखने को मिलती थी। लेकिन, लॉकडाउन के चलते चहल पहल कम रही। नूरी मस्जिद के इमाम शकीउर रहमान ने बताया हरेक मुसलमान को इद-उल-फितर से पहले सदका-ए-फितर निकालना जरूरी है। उसका रोजा उस वक्त तक बारगाहे खुदाबंदी में नहीं पहुंचता है, जब तक कि वे सदका-ए-फितर को अदा नहीं करते हैं। । ईद को लेकर उत्साह तो जरूर है, लेकिन लॉकडाउन का पालन करते हुए खुद, परिवार वालों व समाज के लोगों को स्वास्थ्य का भी ख्याल रखना है। ईद सादगी से मनानी है। यह अपनों का त्योहार है।

हाफिज जलालुद्दीन इस बार ईद सादगी वाली होगी, लेकिन उत्साह में कोई कमी नहीं होगी। कोरोना का प्रकोप जल्द खत्म हो बस यही दुआ है। जरूरतमंदों का ख्याल रखें। गले मिलें न मिलें दिल जरूर मिलना चाहिए। मुबारकबाद देने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेंगे।

फातिमा अंजुम, शिक्षिका घरों में रहकर ईद की नमाज करेंगे

पूसा प्रखंड के चकलेवैनी में मुस्लिम समाज के लोगों ने यह तय कर रखा है कि ईद की नमाज मस्जिद व ईदगाह में अदा नहीं करेंगे। मो. याकुब ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण सरकार ने जो लॉकडाउन का फैसला लिया है, वह हम सभी के लिए अति आवश्यक है। इसलिए, ईद की नमाज अपने घरों में ही अदा करेंगे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को आवेदन भेजकर आश्वस्त किया है।

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