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श्रम कानूनों में रियायत देने से सुधरेगी अर्थव्‍यवस्‍था, तरक्‍की करेगा ग्रामीण क्षेत्र, कम होंगे प्रवासी मजदूर

नई दिल्‍ली। कोरोना संकट के चलते हुए लॉकडाउन की बदौलत पहले ही देश की अर्थव्‍यवस्‍था को काफी नुकसान हो चुका है। ऐसे में अब लॉकडाउन में कुछ ढील देकर देश और राज्‍यों की अर्थव्‍यवस्‍था को वापस पटरी पर लाने की कवायद शुरू हो गई है।

केंद्र और राज्‍य सरकारें इस संबंध में जो कदम उठा रही हैं उनका रिजल्‍ट आने में भले ही वक्‍त लगे, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि ये कदम और इनसे आने वाले परिणाम सकारात्‍मक होंगे। आपको बता दें कि उत्‍तर प्रदेश, एमपी समेत गुजरात सरकार ने अगले तीन वर्षों के लिए करीब 30 से अधिक श्रम कानूनों को निलंबित कर दिया है। इसके लिए अध्यादेश भी जारी किया जा चुका है। वहीं कुछ अन्‍य राज्‍य भी इसी तरह का कदम उठाने जा रहे हैं। इन कदमों और इनके प्रभावों पर दैनिक जागरण से बात करते हुए नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्ल्कि फाइनेंस एंड पॉलिसी की अर्थशास्‍त्री राधिका पांडे ने इसको एक सकारात्‍मक कदम बताया है।

उनका कहना है कि यूपी सरकार का ये फैसला सराहनीय है और इससे राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। उनके मुताबिक काफी समय में उद्योग इस तरह की मांग कर रहे थे कि श्रम कानूनों को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया जाना चाहिए। इसको देखते हुए ही ये कदम भी उठाया गया है। इसके तहत उद्योग अपने यहां पर श्रमिकों को रख सकेंगे और साथ ही ऐसे श्रमिकों को जो ठीक काम नहीं कर रहे हैं या सही परफॉर्म नहीं कर रहे हैं उन्‍हें निकाला भी जा सकेगा। इस कदम का एक सबसे बड़ा पहलू भी यही है कि श्रमिकों को भी इस बात की जानकारी होगी कि यदि उन्‍होंने काम नहीं किया तो उन्‍हें बाहर भी किया जा सकता है।

राधिका का ये भी कहना था कि लॉकडाउन की वजह से उद्योगों पहले ही काफी नुकसान हो चुका है, अभी तो उस नुकसान की भरपाई करनी ही बेहद जरूरी है। लिहाजा श्रम कानूनों में इस तरह की ढिलाई जरूरी थी जिससे उद्योगों को वापस पटरी पर लाया जा सके। यही वजह है कि यूपी सरकार का ये कदम न सिर्फ एक राज्‍य बल्कि पूरे देश की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए एक सकारात्‍मक कदम है।

इसमें एक अच्‍छी बात ये भी है कि श्रमिकों के हितों से जुड़े कुछ पहलूओं को भी इसमें ध्‍यान रखा गया है। इसमें समय पर उनकी तनख्‍वाह देना और उनके स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल शामिल है। इस कदम से एम्‍प्‍लॉयर या नियोक्‍ता है उसके हाथों में कुछ और फैसले लेने का अधिकार आ गया है।

उनके मुताबिक श्रम कानूनों के अलावा कृषि से जुड़े एपीएफसी में भी कुछ रियायत दी गई है। उनके मुताबिक कुछ समय के लिए श्रमिकों की कमी उद्योगों में जरूर दिखाई देगी। इसकी वजह है प्रवासी मजदूरों के मन में अब ये बात काफी हद तक घर कर गई है कि उन्‍हें कम से कम अपने यहां पर वापस जाकर रोटी तो मिल ही जाएगी। उन्‍हें ये भी लगता है कि ऐसे बुरे हालातों में वे अपने गांव में खेतों में ही सही लेकिन काम कर सकेंगे। इसकी वजह से श्रमिकों का एक बड़ा हिस्‍सा कृषि क्षेत्र की तरफ चला जाएगा। इसका एक सबसे बड़ा फायदा आने वाले दिनों में दिखाई देगा। इसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्र में तरक्‍की होगी। एपीएफसी रिफॉर्म के अलावा किसानों को अपनी फसल को बेचने के लिए कई केंद्र बनाए गए जो एक बड़ा कदम है।

राधिका का मानना है कि अब आने वाले समय में भी जो कदम उठाए जाएंगे वो ग्रामीण क्षेत्र को आगे बढ़ाने के मकसद से उठाए जाएंगे। भविष्‍य में प्रवासी मजदूरों की संख्‍या में गिरावट आएगी और सरकार की तरफ से जो उन्‍हें आर्थिक मदद दी जा रही है उसका भी उन्‍हें फायदा होगा। इसका नतीजा ग्रामीण क्षेत्र में मांग और आपूर्ति दोनों पर ही पड़ेगा। इसका एक असर ये भी होगा कि भविष्‍य में राज्‍य के अंदर ही इन श्रमिकों को अपनी आजीविका चलाने के लिए काम मिलेगा और स्‍थानीय स्‍तर पर छोटे-बड़े व्‍यवसाय आगे बढ़ेंगे।

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