बिहार

बारिश और ओलावृष्टि से फसल क्षति के लिए 15 मई तक पीड़ित किसानों को कृषि इनपुट अनुदान दें: नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मार्च महीने में भारी बारिश और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति के लिए दिए जा रहे कृषि इनपुट अनुदान का वितरण 15 मई तक पूरा करने का निर्देश दिया है। ताकि जो भी किसान आवेदन किये हैं, उन सभी को अनुदान मिल जाय।

साथ ही मुख्यमंत्री ने अप्रैल महीने में बारिश और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति में भी किसानों के आवेदनों की जांच कर मई के अंत तक अनुदान का भुगतान सुनिश्चत करने पर भी विशेष जोर देने को कहा है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कृषि, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण तथा सहकारिता विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की और कई निर्देश दिए। 

उन्होंने राज्य के सभी जिलों में मौसम के अनुकूल खेती शुरू करने का निर्देश दिया है। गौरतलब हो कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूर्व में राज्य के आठ जिलों भागलपुर, बांका, खगड़िया, मधुबनी, गया, मुंगेर, नालंदा और नवादा में मौसम के अनुकूल खेती शुरू की गई है। यह अब सभी जिलों में होगी।

मक्का व पान के नुकसान का भी आकलन करें
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि रबी फसल के साथ-साथ मक्का तथा पान की खेती के भी नुकसान का आकलन कराएं और आगे की कार्रवाई करें। यह भी निर्देश दिया है कि बीज, उर्वरक और रसायन की आवश्यकता के अनुरूप इसकी उपलब्धता सुनिश्चत हो। पराली जलाने पर कड़ी नजर रखें।  पराली जलाने से वातावरण के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति को भी नुकसान होता है। खेती के कार्यों में सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखें। कोरोना संक्रमण से बचाव का यही एक प्रभावी उपाय है।  

क्या है मौसम के अनुकूल खेती
इसके तहत जिस इलाके में जैसा मौसम होगा उसी के अनुरूप वहां पर फसल का भी चयन होगा। ताकि उसका पैदावार बेहतर हो और नुकसान की आशंका नहीं रहे।  किसानों को फसल की अच्छी कीमत मिलेगी। वैज्ञानिकों की देखरेख में यह खेती होगी। इसका एक मकसद यह भी है कि एक साल में कम से तीन फसल पैदा करने की व्यवस्था इसमें होगी। पिछले कुछ सालों में हो रहे जलवायु परिवर्तन को देखते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है।

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