समस्तीपुर Town

कोरोना काल में एसएनसीयू में बच्चों की बेहतर देखभाल, बरती जाती सावधानी

समस्तीपुर। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अहम प्रयास किए जा रहे। इस संक्रमण से बचने के लिए लोग एहतियात बरत रहे। ऐसे माहौल में जन्म लेनेवाले बच्चों को लेकर अस्पताल पूरी तरह से सतर्क है। सदर अस्पताल में प्रीटर्म बेबी या कम वजन वाले नवजात का जिनका एसएनसीयू में भेजा जाता है, उन्हें दाखिला लेने से पूर्व एहतियात बरती जा रही। फिलहाल, सात मासूम बच्चों का इलाज चल रहा। उनका इलाज करनेवाले डॉक्टर व एएनएम भी अपने हाथों को वाश कर सैनिटाइज करने के बाद ही छूते हैं। बच्चे को दूध पिलानेवाली मां भी जब दूध पिलाने के लिए आ जाती हैं तो उनके हाथों को हैंडवाश कराया जाता है, उसके बाद ही बच्चों को दूध पिलाने की अनुमति मिलती है। इससे पूर्व उनके बारे में पूरी जानकारी भी ली जाती है। एसएनसीयू में बच्चों की हो रही गहन देखभाल

एसएनसीयू के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार कंचन ने बताया कि गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पूर्व जन्म लेनेवाले नवजात को अधिक खतरा रहता है। ऐसे में उन्हें गहन देखभाल की जरूरत होती है। इसको लेकर सदर अस्पताल में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की स्थापना की गई है। चिकित्सकों की उपस्थिति के साथ बेहतर सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने बताया कि प्रीटर्म बेबी को तीन श्रेणियों में रखा गया है। पहली श्रेणी में ऐसे नवजात आते हैं जिनका जन्म 32 से 37 सप्ताह के बीच होता है। दूसरी श्रेणी में 28 से 32 सप्ताह के बीच एवं तीसरी श्रेणी में 28 सप्ताह से पूर्व जन्म लिए नवजात को रखा जाता है। दूसरी एवं तीसरी श्रेणी के बच्चों की गहन देखभाल की जरूरत होती है। इसलिए, जटिलता के आधार पर ऐसे नवजातों को चिकित्सकीय परामर्श पर एसएनसीयू रेफर किया जाता है। प्री टर्म बेबी का रखें ऐसे ख्याल

प्री टर्म बेबी को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इसके लिए नवजात को कंगारू मदर केयर देने की सलाह दी जाती है, जिसमें माता, नवजात को अपनी छाती पर चिपकाकर रखते हैं। इस प्रक्रिया से नवजात को शरीर की ऊष्मा प्राप्त होती है एवं नवजात स्वस्थ रहता है। सामान्यत: शिशु को दिन भर में आठ से दस बार स्तनपान कराने की जरूरत होती है। लेकिन, प्री टर्म नवजात को इससे अधिक बार स्तनपान कराना चाहिए। ऐसे नवजातों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। इसलिए, नवजात को अधिक बार स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है। इससे नवजात को संक्रमण जैसे डायरिया, निमोनिया से बचाव होता है।

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