कल्याणपुर

समस्तीपुर : नहीं मिली नाव तो बेरा को ही बनाया सहारा

समस्तीपुर । बागमती क्षेत्र के जिन निचले इलाके में पानी का फैलाव हुआ है वहां नाव की स्पष्ट कमी दिख रही है। नाव की अनुपलब्धता की वजह से लोग बेरा (नाव व ड्रम के सहारे बनाया गया अस्थायी वाहक) से ही काम चला रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र में नाव के अभाव में बेरा का सहारा लेकर ही लोग अपना दैनिक कार्य कर रहे हैं। कल्याणपुर प्रखंड की बरहेत्ता पंचायत के कमरगामा, गोबरसीटठा, जटमलपुर ढाब, खरसंड पश्चिमी आदि गांव में अधिकतर अनुसूचित जाति के लोगों के घर में बागमती का पानी प्रवेश कर चुका है। आवश्यक आवश्यकता के कार्य को लेकर लोग बेरा का उपयोग कर बांध पर जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में ग्राम पंचायत के मुखिया को सूचना दे दी गई है। वहीं अंचलाधिकारी अभय पद दास ने बताया कि अंचल निरीक्षक सत्यनारायण पांडे एवं हल्का कर्मचारी सुधीर महतो को इसके लिए अधिकृत किया गया है। 24 घंटे जलस्तर वृद्धि पर नजर रखी जा रही है। वैसे शनिवार को जलस्तर में वृद्धि नहीं हुई। सहायक अभियंता अभिषेक कुमार ने बताया कि बांधों की मरम्मत देखरेख का कार्य चल रहा है। जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है।

करेह, कमला कोसी व बागमती के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी

बिथान:- प्रखंड क्षेत्र से होकर बहने वाली करेह, कमला कोसी व बागमती के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। बारिश थमने के बाद भी नदी के जलस्तर में काफी बढ़ोतरी हो रही है। इस कारण प्रखंड के चार पंचायत बेलसंडी, नरपा, सलहाबुजुर्ग, सलहाचंदन के दर्जनों गांव पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। गांव के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने वाली पगडंडियों एवं सड़क पर बाढ़ का पानी फैल गया है। पगडंडियों एवं सड़क पर फैले हुए एक से दो फीट पानी से होकर लोग प्रखंड मुख्यालय जिला मुख्यालय एवं गांव के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचते हैं। पिछले दिनों की अपेक्षा इन दिनों करेह कमला, कोसी व बागमती नदी के जलस्तर में हो रही तेजी से बढ़ोतरी के कारण ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि अगले दो दिनों में बाढ़ का पानी गांव में प्रवेश कर जाएगा। इस आशंका से गांव के लोग ऊंचे स्थलों पर शरण लेने में जुट गए हैं।

चार महीने तक बाढ़ प्रभावित रहता है प्रखंड का चार पंचायत

प्रखंड की चार पंचायत प्रत्येक साल नदी के जलस्तर में वृद्धि होने पर जलजमाव की चपेट में आ जाती है। प्रत्येक साल जुलाई-अगस्त से लेकर नवंबर तक गांव में नदी का पानी फैला रहता है। इस दौरान गांव के लोग अस्थाई रूप से गांव छोड़ अपने मवेशियों के साथ हसनपुर सकरी रेलवे लाइन एवं वाटर वेज बांध पर शरण लेने को विवश होते हैं। गांव स्थित सरकारी विद्यालय व सार्वजनिक स्थल भी बाढ़ पीड़ितों के लिए शरणस्थली का काम करता है। कुल मिलाकर पांच महीने तक बाढ़ प्रभावित पंचायतों के लोगों के बीच बाढ़ के कारण आवास, भोजन व पेयजल की समस्या उत्पन्न रहती है। लोग प्लास्टिक से तंबू बनाकर जीवन यापन करते हैं बाढ़ के समय सबसे ज्यादा पशुपालकों के लिए समस्या बनी हुई रहती है। परसों खुले आकाश के नीचे बारिश एवं धूप में रहता है। बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए जिलाधिकारी शशांक शुभंकर के दौरे के बाद अनुमंडल पदाधिकारी रोसरा अमन कुमार सुमन ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर जायजा लिया। अंचलाधिकारी राजीव रंजन अन्य प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मचारी लगातार पाठ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। अंचलाधिकारी की देखरेख में प्रखंड कर्मी पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क कर वार्ड वार सूची बनाने में लगे हैं। प्रखंड विकास पदाधिकारी आफताब आलम ने बताया कि बाढ़ से पूर्व बाढ़ प्रभावित पंचायतों में अनुश्रवण समिति की बैठक की गई थी ।

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