बिहार

बिहार में नदियों से मछली पकड़ने पर 15 अगस्त तक लगी रोक

बिहार में नदियों से मछलियों के शिकार पर रोक लगा दी गई है। यानी खुली नदी से 15 अगस्त तक कोई मछली नहीं पकड़ सकता है। ऐसा बरसात में मछलियों के प्रजनन काल को देखते हुए किया गया है। चूंकि इन दो महीनों में शिकार माही पर लगी रोक से नदियों के किनारे रहने वाले गरीब मछुआरे सीधे तौर पर प्रभावित होगे, इसलिए इस अवधि में सरकार की ओर से उन्हें वित्तीय सहायता दी जाएगी। 

राज्य में बहने वाली गंगा, गंडक, बागमती, कमला, सोन, सरयू, मेची समेत सभी प्रमुख सदाबहार नदियों के किनारे मछलियां पकड़ कर जीवन यापन करने वाले 5 लाख से अधिक मछुआरे सरकार के इस निर्णय से प्रभावित होंगे। बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम की धारा 13 के तहत शिकार माही पर यह प्रतिबंध लगाया गया है। इसी अधिनियम की धारा 17 के तहत रोक के बावजूद यदि कोई मछुआरा मछली मारते पकड़ा जाता है तो जुर्माना से लेकर कैद तक का प्रावधान है। यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में है।  पर्यावरण विदों का मानना है कि यह समय मछलियों की संतति वृद्धि का होता है। साथ ही मछलियों का उत्पादन घटे नहीं, इसलिए इस अवधि में मछलियां नहीं मारी जाती हैं।

यह है मछुआरों की सहायता योजना 
गरीब मछुआरों के लिए सरकार ने ‘राहत एवं बचत योजना’ तैयार की है।  यह योजना पहली बार लायी जा रही है। इसमें बीपीएल श्रेणी के 18 से 60 वर्ष के मछुआरे को शामिल किया गया है। ऐसे लोग निकटवर्ती मछुआरा समिति के सदस्य होने चाहिए। शिकार माही से जिनकी जीविका चलती है, उन्हें सरकार प्रतिबंध की अवधि में 15 सौ रुपए हर माह देगी। साथ ही उन्हें अपना 15 सौ रुपए भी जमा रखना होगा। इस योजना पर 120 करोड़ रुपए खर्च होंगे और राज्य के विभिन्न हिस्सों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

डॉ. प्रेम कुमार, पशुपालन मंत्री, बिहार कहते हैं कि जिन मछुआरों का उपार्जन शिकारमाही पर निर्भर है, उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की मदद से चलाई जाने वाली योजना से मदद की जाएगी। उसके लिए मत्स्यजीवी समितियों से बात की जाएगी। मछुआरों को चिह्नित कर उनका बैंक खाता खुलवाया जाएगा, ताकि पैसा सीधे उनके खाते में जा सके। सरकार तीन माह तक उनकी जीविका चलाने में सहयोग देगी।

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